क्या आप जानते हैं कि लोग श्राद क्यो करते हैं?? आओ जाने
फिल्म 'झुक गया आसमान' का गीत सुना ही होगा- "जिस्म को मौत आती है लेकिन, रूह को मौत आती नहीं है"। रूह (आत्मा) अजर-अमर कही जाती है। माना जाता है कि आत्मा कभी नष्ट नहीं होती। श्रीमद् भागवत के अनुसार जन्म लेने वाले की मृत्यु और मृत्यु को प्राप्त होने वाले का जन्म निश्चित है। जीवन-मरण का ये चक्र प्रकृति का नियम है। सनातनी संस्कृति का लोक विश्वास है कि व्यक्ति अपने जीवन काल में किये कर्मों के अनुसार पाप और पुण्य का भागी होता है। अच्छे कर्मों से उसे स्वर्ग लोक तथा बुरे कामों से नरक भोगना पड़ता है। भावनात्मक लगाव के कारण पितर लोक में रहने वाले पित्रों की याद उनके वंशजों को अवश्य आती है और पितृऋण चुकाने के लिये उनकी श्रद्धा सदैव बनी रहती है। इसी निमित्त श्राद्ध में दान-पुण्ड किया जाता है। पुराणों में भी कहा गया है कि एक निश्चित समय पर विधि विधान से अपने पितरों को श्रद्धा पूर्वक याद किए जाने वाला कर्म ही श्राद्ध है। हमारी लोक आस्था ये भी है कि श्राद्ध से प्रसन्न होकर पितृगणों द्वारा अपने वंशजों को विद्या, धन, आयु, आरोग्य और संतान...